AAP से गठबंधन करें या नहीं? फोन पर कार्यकर्ताओं से राय लेगी कांग्रेस

AAP से गठबंधन करें या नहीं? फोन पर कार्यकर्ताओं से राय लेगी कांग्रेस

नई दिल्ली : दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार कांग्रेस के साथ राज्य में गठबंधन की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस की प्रदेश ईकाई इसके विरोध में है। ऐसे में अब पार्टी ने फैसला लिया है कि वह इस मुद्दे पर बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं की राय लेगी। पार्टी कार्यकर्ताओं से पूछा जाएगा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन हो या नहीं। कांग्रेस के एक सीनियर नेता ने बताया कि दिल्ली के कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको की आवाज में एक मेसेज रेकॉर्ड किया जाएगा और कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ताओं से फोन पर आईवीआर के जरिए गठबंधन को लेकर राय मांगी जाएगी। 

सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी के शक्ति प्रॉजेक्ट पर रजिस्टर्ड कांग्रेस के 52 हजार कार्यकर्ताओं से भी इस बारे में राय ली जाएगी। चाको ने कहा कि यह एक्सरसाइज बुधवार शाम से शुरू हो गई है। उन्होंने कहा, 'मैंने दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष, वर्किंग प्रजिडेंट, पूर्व दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमिटी प्रमुख और जिलाध्यक्षों से बात की है। उनके विचार रेकॉर्ड किए गए हैं। अब हम कार्यकर्ताओं के विचार मांग रहे हैं।'

चाको ने कहा कि पार्टी की प्राथमिकता प्रदेश में बीजेपी को जीतने से रोकने की है। उन्होंने कहा, 'हमारा लक्ष्य बीजेपी को हराना है। हम कांग्रेस कार्यकर्ताओं से इस बारे में चर्चा कर रहे हैं कि बीजेपी को हराने की सबसे अच्छी रणनीति क्या होगी।'

वहीं एएपी का कहना है कि कांग्रेस पार्टी राज्य में उनके साथ गठबंधन न करने के बहाने खोज रही है। आप के प्रवक्ता सौरभा भरद्वाज ने कहा, 'पहले उन्होंने इस बात को नकार दिया कि वे एएपी के साथ किसी भी तरह की बातचीत कर रहे हैं। इसके बाद जब यह बात जनता के सामने आ गई तो उन्होंने प्रदेश ईकाई का नाम लेकर बचने की कोशिश की। अब वे बूथ लेवल कार्यकर्ताओं से राय लेने की बात कहकर गठबंधन न करने का बहाना ढूंढ रहे हैं। दरअसल कांग्रेस पार्टी वास्तव में बीजेपी के साथ गठबंधन कर रही है, ताकि गैर-बीजेपी वोट बंट जाएं।'

यह पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस के बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं से किसी मुद्दे पर राय ली गई हो। सूत्रों का कहना है कि जब पार्टी नेता अजय माकन ने दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था, तब भी इस तरह की एक्सरसाइज की गई थी। पार्टी ने मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के नाम का चुनाव करने से पहले भी पार्टी कार्यकर्ताओं से राय ली थी।