सीईओ ने कर्मचारियों से कहा- वेतन को लेकर बैंकों ने अब तक कोई वादा नहीं किया

सीईओ ने कर्मचारियों से कहा- वेतन को लेकर बैंकों ने अब तक कोई वादा नहीं किया

नई दिल्ली: कर्ज संकट से गुजर रही एयरलाइन जेट एयरवेज ने शुक्रवार को कर्मचारियों के लंबित वेतन को लेकर अपना पक्ष रखा। कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि एसबीआई के नेतृत्व में निवेशकों के दल ने स्पष्ट किया है कि जब तक नीलामी प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक वेतन भुगतान को लेकर हम कोई भी दावा करने में असमर्थ हैं।

सीईओ ने कहा- परेशानियां निवेशकों को बताई
एयरलाइन के सीईओ विनय दुबे ने कर्मचारियों को लिखे पत्र में कहा, ‘‘हम लगातार बैंकों को कर्मचारियों की स्थिति के बारे में बता रहे हैं। हमने उन्हें कहा है कि यदि ऐसे हालात ज्यादा दिनों तक बने रहते हैं तो कर्मचारियों के सामने कोई और नौकरी ढूंढने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।’’ 

सीईओ दुबे ने बताया, ‘‘दुर्भाग्य से बैंकों ने कहा है कि वेतन के बारे में हम किसी भी तरह का दावा करने में असमर्थ हैं। नीलामी प्रक्रिया जब तक पूरी नहीं होती, तब तक तो बिल्कुल नहीं। हम इस वास्तविकता का सामना कर रहे हैं। बावजूद इसके कि हमने हर कर्मचारी के द्वारा भोगी जा रही दिक्कतों से बैंकों को अवगत कराया है।’’ 

सीईओ दुबे ने कहा, ‘‘हमने कई बोर्ड मीटिंग्स में निवेशकों और शेयरधारकों से कंपनी को आपातकालीन फंड दिए जाने की बात कही है ताकि कर्मचारियों का वेतन दिया जा सके। जेट एयरवेज की टीम ने अपनी ओर से सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। अब तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकल पाया है।’’

जेट एयरवेज पर 8 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। पिछले कुछ महीनों से कंपनी अपने कर्मचारियों को सैलरी तक नहीं दे पाई है। इनमें ग्राउंड स्टाफ कर्मचारियों के साथ-साथ पायलट और इंजीनियर भी शामिल हैं।

पिछले दिनों कंपनी के अधिकारियों के दल ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की थी। मंत्री जेटली ने निवेशकों के दल से बात करने का आश्वासन दिया था। 

जेट एयरवेज ने कर्मचारियों से की अपील
जेट एयरवेज ने विमान मैंटेनेंस इंजीनियर और मैंटेनेंस से जुड़े कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है ताकि कंपनी के पास मौजूद विमानों की नियमित जाँच आदि की जा सके। कंपनी ने इन कर्मचारियों को भेजे संदेश में लिखा है कि दिल्ली में अब भी उसके कई विमान खड़े हैं, जिनकी नियमित जाँच और रखरखाव जरूरी है, अन्यथा ये विमान उड़ान भरने के लायक नहीं रह जायेंगे।  

उत्तरी और पूर्वी भारत के लिए एयरलाइन के क्षेत्रीय प्रबंधक (लाइन मैंटेनेंस) पवन छाबड़ा ने लिखा, “हम ऐसा होने देने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि इससे कंपनी को पटरी पर लाने की योजना खटाई में पड़ सकती है। वेतन नहीं मिलने के कारण आप जिस दर्द और कठिनाइयों से गुजर रहे हैं, मैं उसे पूरी तरह समझता हूँ। इसके बावजूद मैं आपसे काम पर लौटने और जरूरत की इस घड़ी में कंपनी की मदद करने की अपील करता हूँ।”