कांग्रेस को चाहिए ‘जिताऊ उम्मदीवार’, दुसरे दलों के प्रत्याशियों को भी दे रही टिकट

कांग्रेस को चाहिए  ‘जिताऊ उम्मदीवार’, दुसरे दलों के प्रत्याशियों को भी दे रही टिकट

लखनऊ: कांग्रेस ने जहां स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतार कर इस लोकसभा चुनावों के प्रति अपनी गंभीरता का प्रमाण दिया, वहीं टिकट बंटवारे में पार्टी नेताओं की अपरिपक्वता साफ दिख रही है। जिताऊ प्रत्याशियों की 'तलाश' में पार्टी नेताओं की अनदेखी से जहां चुनाव से पहले ही कई सीटों पर विरोध के स्वर सुनाई देने लगे हैं। वहीं दूसरे राजनैतिक दल से प्रत्याशी घोषित हो चुके नेता को टिकट दिए जाने से पार्टी की किरकिरी हो गई।

गुरुवार को पार्टी ने उत्तर प्रदेश की महराजगंज सीट से पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के बेटी तनुश्री त्रिपाठी को प्रत्याशी घोषित कर दिया। उम्मीदवार की घोषणा से पहले पार्टी नेताओं ने यह भी नहीं देखा कि तनुश्री को पहले ही शिवपाल सिंह यादव के नेतृत्व वाली प्रसपा महराजगंज सीट से ही अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। अमरमणि त्रिपठी और उनकी पत्नी मधुमणि कवियत्री मधुमिता हत्याकांड में जेल में हैं। विधानसभा चुनाव में अमरमणि के बेटे अमनमणि ने भी कांग्रेस से टिकट मांगा था, लेकिन कांग्रेस ने इनकार कर दिया था।

लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अमनमणि की जीत के बाद कांग्रेस को तनुश्री जिताऊ प्रत्याशी दिखने लगी। हालांकि, गुरुवार को तनुश्री की घोषणा होने के बाद से सोशल मीडिया ने कांग्रेस की जमकर बखिया उधेड़ी। असर यह हुआ कि शुक्रवार की सुबह ही पार्टी ने गलती मानते हुए वहां से पूर्व सांसद हर्षवर्धन सिंह की बेटी सुप्रिया श्रीनेत को टिकट दिया।

कार्यकर्ताओं में तेज हुआ विरोध
जिताऊ प्रत्याशियों की तलाश में कांग्रेस हाईकमान पैराशूट प्रत्याशियों पर ज्यादा भरोसा जता रहा है। इसके चलते पार्टी के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच विरोध उभर रहा है। उदाहरण के तौर पर इटावा को ही देख लें। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अशोक सिंह पिछले एक दशक से इटावा क्षेत्र में मेहनत कर रहे हैं। हाईकमान से लेकर जिम्मेदार नेताओं तक उन्हें टिकट का आश्वासन दिया गया था, लेकिन शुक्रवार को कांग्रेस ने वहां से भाजपा छोड़ एक दिन पहले पार्टी में आए अशोक दोहरे को प्रत्याशी घोषित कर दिया। इसी तरह देवरिया सीट पर पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह को टिकट का आश्वासन मिला था। वह लगातार क्षेत्र में मेहनत कर रहे थे, लेकिन ऐन मौके पर टिकट बसपा से आए नियाज अहमद को दे दिया गया। इसी तरह सीतापुर, बहराइच, बस्ती, पीलीभीत और फूलपुर सहित दर्जन भर ऐसी सीटें हैं, जहां पार्टी नेताओं को किनारे कर पैराशूट प्रत्याशियों को उतारा गया है। 

जितिन धौरहरा से ही लड़ेंगे
पूर्व मंत्री और राहुल गांधी की कोर टीम के सदस्य जितिन प्रसाद को लेकर पिछले एक हफ्ते पर कांग्रेस में असमंजस की स्थिति रही। जितिन को लखीमपुर की धौरहरा लोकसभा सीट से टिकट दिया गया था। इसी बीच चर्चा उड़ी की जितिन दूसरी सीट पर लड़ना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें लखनऊ से लड़ने को कहा जिसको लेकर जितिन कांग्रेस छोड़ भाजपा में जा रहे हैं। चर्चाओं पर न तो कांग्रेस हाईकमान ने विराम लगाया और न ही जितिन ने।

चर्चाएं और बढ़ी, तो गुरुवार को जितिन मीडिया के सामने आए और खुद का कांग्रेस का सिपाही बताते हुए लखनऊ के लिए रवाना हुए, तो धौरहरा के कार्यकर्ताओं ने उनका रास्ता रोक लिया। इन नाटकीय प्रकरण के बाद कांग्रेस ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि जितिन धौरहरा से ही लड़ेंगे। लखनऊ लोकसभा सीट के लिए प्रत्याशी की तलाश जारी है। संभावना है कि लखनऊ से पार्टी स्थानीय कार्यकर्ता को तवज्जो देगी।